लखनऊ: लखनऊ: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के 123 वर्षों के इतिहास में आज तक कोई दलित या पिछड़ा वर्ग का व्यक्ति कुलपति (VC) नहीं बना है। वर्तमान VC का कार्यकाल 9 अगस्त को समाप्त हो रहा है और नए कुलपति की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी बीच लोकसभा के तीन प्रमुख सांसदों—चन्द्र शेखर आजाद, आर.के. चौधरी और लालजी वर्मा (पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री)—ने बड़ा मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल (Governor) को पत्र लिखकर मांग की है कि इस बार KGMU VC के पद पर किसी दलित या पिछड़े (OBC) वर्ग के योग्य व्यक्ति की नियुक्ति की जाए।

तीनों सांसदों ने कहा है कि केजीएमयू (KGMU)के इतिहास में अब तक दलित, पिछड़े, आदिवासी या अल्‍पसंख्‍यक वर्ग के किसी योग्‍य व्‍यक्ति को प्रतिनिधित्‍व नहीं दिया गया है। इसलिए केजीएमयू के 100 साल से अधिक के इतिहास में पहली बार किसी दलित, पिछड़े या आदिवासी वर्ग के योग्य व्यक्ति को कुलपति नियुक्त किया जाए।

सांसद चंद्र शेखर आजाद ने ई मेल और X पर, सांसद एवं पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री लाल जी वर्मा, सांसद और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री माननीय आर के चौधरी और पूर्व मंत्री माननीय स्वामी प्रसाद मौर्य ने राज्यपाल को इस बार दलित या पिछड़े वर्ग का कुलपति बनाने हेतु पत्र लिखा है। गौरतलब है कि केजीएमयू की वर्तमान कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद का कार्यकाल 9 अगस्त 2026 को समाप्त हो रहा है और नए कुलपति के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसी क्रम में तीनों सांसदों ने राजभवन को पत्र भेजकर अपनी गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।

‘Not Found Suitable’ कहकर रोका गया

मोहनलालगंज से सांसद आर. के. चौधरी ने पत्र में स्पष्ट किया है कि केजीएमयू देश का एक सदी पुराना ख्याति प्राप्त संस्थान है, लेकिन आज तक इसका मुखिया कभी वंचित वर्ग से नियुक्त नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली नियुक्तियों में अक्सर “नॉट फाउंड सूटेबल” (Not Found Suitable) की आड़ लेकर दलित, पिछड़े एवं अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को कुलपति पद से वंचित रखा गया है। उन्होंने राज्यपाल से इस बार ऐतिहासिक कदम उठाने की अपील की है।

सांसद लालजी वर्मा ने भी उठाई आवाज

सांसद लालजी वर्मा ने भी इस मांग का पुरजोर समर्थन करते हुए राजभवन को अपना पत्र भेजा है। लाल जी वर्मा समय समय पर आरक्षित और वंचित वर्ग के लोगों के लिए आवाज उठाते रहे हैं। वह पूर्व में यूपी सरकार के चिकित्‍सा शिक्षा मंत्री भी रह चुके हैं। उन्‍हें केजीएमयू की स्थितियों के बारे में गहराई से जानकारी है। उन्‍होंने कहा है कि इतने बड़े और ऐतिहासिक संस्थान में वंचित समाज का प्रतिनिधित्व शून्य होना चिंताजनक है।

सांसद चन्द्र शेखर ने उठाए नियुक्तियों पर गंभीर सवाल

नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट चन्द्र शेखर ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति के सदस्य के रूप में अपने अनुभवों का हवाला देते हुए कई गंभीर मुद्दे उठाए हैं।

उन्‍होंने कहा है कि  जिन संस्थानों के नीति-निर्धारण एवं निर्णायक पदों पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं होता, वहां इन वर्गों के आरक्षण, पदोन्नति, प्रतिनिधित्व तथा अन्य संवैधानिक अधिकारों के प्रभावी क्रियान्वयन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न होती हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव सामाजिक न्याय की संवैधानिक अवधारणा पर पड़ता है और वंचित वर्गों का विश्वास भी कमजोर होता है।

  • चंद्र शेखर ने आरोप लगाया है कि वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में शैक्षणिक संवर्ग के आरक्षित वर्ग के 108 पदों के सापेक्ष मात्र 30 नियुक्तियां की गईं और शेष 78 पदों को “नॉट फाउंड सूटेबल” (Not Found Suitable) बताकर रिक्त छोड़ दिया गया।

  • कार्य परिषद द्वारा अनुमोदित लगभग 100 शैक्षणिक बैकलॉग पदों को आज तक विज्ञापित नहीं किया गया है। वहीं, शिक्षकों की कमी का हवाला देकर संविदा के माध्यम से नियुक्तियां की जा रही हैं, जो आरक्षण नीति पर सीधा प्रहार है।

  • उन्होंने संविधान के अनुच्छेदों (14, 15(4), 16(4), 16(4क) तथा 46) का हवाला देते हुए सामाजिक न्याय, समान अवसर और समावेशी प्रशासन की भावना को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।

स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने भी लिखा पत्र

पूर्व मंत्री व अपनी जनता पार्टी के अध्‍यक्ष स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने भी कुलपति के पद पर किसी दलित पिछड़े वर्ग से कुलपति नियुक्‍त किए जाने का आग्रह किया है।